रबड़ की खेती करके कमाने का है सुनहरा मौका, केंद्र सरकार और विश्व बैंक भी कर रही है मदद

रबड़ का उपयोग
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Rubber Farming: भारत में रबड़ की खेती की डिमांड बढ़ती जा रही है क्योंकि भारत से एक्सपोर्ट की जाने वाली रबड़ को जर्मनी ब्राजील अमेरिका इटली तुर्की बेल्जियम चीन मलेशिया पाकिस्तान के अलावा नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात में एक्सपोर्ट किया जा रहा है जिसकी वजह से इसकी डिमांड में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है यानी कि अब रबर की खपत बढ़ने की वजह से आपके लिए यह बढ़िया बिजनेस हो सकता है.

भारत आज के टाइम बराबर उत्पादन और एक्सपोर्ट करने में चौथा सबसे बड़ा देश बन चुका है. वर्तमान में रावण की खेती सबसे ज्यादा केरल राज्य में की जाती है. इसके अलावा त्रिपुरा असम मेघालय नगालैंड मणिपुर और मिजोरम के साथ अरुणाचल प्रदेश में भी प्राकृतिक रूप से सबसे अधिक रबड़ की खेती कर रहे हैं. जिसकी वजह से इसकी डिमांड काफी ज्यादा बढ़ रही है.

रबड़ का उपयोग

रबड़ के कई प्रकार के प्रोडक्ट बनाए जाते हैं इसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को विद्युत रोधी बनाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. इतना ही नहीं व्हीकल में भी जमकर रबड़ का उपयोग टायर ट्यूब बनाने में किया जा रहा है .

इसके अलावा कई प्रकार के सांसद की वस्तुएं और रेफ्रिजरेटर गेंद बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है जिसकी वजह से यह रबड़ फार्मिंग डिमांडिंग है और इसके लिए केंद्र सरकार तथा विश्व बैंक भी आप लोगों को लोन देने के लिए तैयार हो जाती है.

रावण की खेती कैसे करें?

इसकी खेती करने से पहले आपको जानना होता है कि रबड़ की खेती करने के लिए लेटराइट या लाल दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है. इसके अलावा जुन जुली महीने में इसकी खेती की जा सकती है और इसकी मिट्टी के लिए पीएच मान 4.5 से लेकर 6 के बीच होना आवश्यक है और पौधों को अच्छी धूप की आवश्यकता पड़ती है और अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि रबर में भी भरपूर मात्रा में पानी होता है.

रबड़ की फार्मिंग (Rubber Farming) के लिए मिट्टी नमी युक्त होना चाहिए. इसके बाद रबड़ की खेती करने के लिए एक जमीन में आप लोग इसके पेड़ लगा सकते हैं. इन पेड़ों की अच्छी देखभाल की जाती है तो लगभग 5 साल में यह पेड़ बनाकर तैयार हो जाते हैं और 40 साल तक आप लोगों को मुनाफा दे सकते हैं. आमतौर पर रावण के पेड़ों की लंबाई 43 मीटर तक होती है जो जंगली पौधे होते हैं । लेकिन खेती के लिए उपयोग किए जाने वाले थोड़े कम और लंबाई भी कम होती है.

कैसे निकलता है रबड़?

इसके लिए एक विशेष प्रकार की टेक्निक Use की जाती है. पेड़ के चारों तरफ थोड़े-थोड़े कट लगाकर उसकी एक कटोरा में इस्तेमाल किया जाता है यानी कि पेड़ के अंदर से निकलने वाले दूध को एकत्रित करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रकार के दूध को लेटेक्स या रबरक्षीर कहते हैं. इसको एकत्रित करके प्रोसेसिंग करने के बाद रबर तैयार किया जाता है और इसे विदेश में एक्सपोर्ट किया जाता है। तो आज के समय यह लाखों कमाने वाला बिजनेस आइडिया आपके लिए बढ़िया हो सकता है.


मेरा नाम विशाल ओझा है. मैने Mathematics से B.sc किया हुआ है। मुझे विज्ञान की अच्छी जानकारी है। इसके अलावा में बिजनेस, मौसम या टेक्नोलॉजी का ज्ञान रखता हूं। इंशॉर्टखबर पर इसी फील्ड में योगदान दे रहा हूं।