
शनि देव की पूजा विधि : शनि देव को धार्मिक शास्त्रों के अनुसार न्याय का देवता माना गया है अगर आप किसी प्रकार का पाप करते हैं तो आप लोगों को सजा देने का काम और उसे व्यक्ति के साथ न्याय करने का काम शनि देवता करते हैं. शनिदेव को यह उपाधि भगवान भोलेनाथ जी के द्वारा दी गई थी जोकि उनके गुरु हैं. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि शनिदेव की पूजा करके किस प्रकार उनकी कृपा पाएं? या फिर शनि देव की पूजा के दौरान उनके ऊपर तेल क्यों चढ़ाया जाता है? तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ सकते हैं.
शनि देव की पूजा विधि
वैसे तो आपको शनि देव की पूजा करने के लिए किसी शनिदेव के मंदिर के पास जाकर पंडित जी से सलाह ले सकते हैं. लेकिन आमतौर पर शनि देव के लिए शनिवार का दिन निश्चित किया गया है. ऐसा माना जाता है कि शनिवार का दिन शनि देव से किसी मनोकामना को मांगने के लिए या फिर उनकी पूजा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है.
वैसे तो उनकी पूजा किसी भी दिन की जा सकती है. इसके अलावा शनि देव की पूजा करने से पहले उन्हें नीले रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं. इसकी पश्चात विधि बात मंत्र उच्चारण के साथ उनको जो पसंद है सभी वस्तुएं पूजा में शामिल की जाती है. और उनकी आरती उतारी जाती है. इस दौरान शनिदेव पर तेल और लोह से बनी हुई वस्तुएं चढ़ाने की परंपरा भी है.
शनिदेव पर क्यों चढ़ाया जाता है तेल
शरीर पर तेल चढ़ाने के पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों प्रकार के कारण हैं. धार्मिक कारण की बात करें तो यह हनुमान जी और शनिदेव की एक कथा से संबंधित है. जब सीता माता को रावण के द्वारा छल से उनका हरण कर लिया गया था. उसके बाद हनुमान जी भगवान श्री राम के आदेश अनुसार समुद्र को एक छलांग में पार करके लंका पहुंच गए थे.
इसके बाद उन्होंने देखा कि रावण के पुत्र मेघनाथ ने युद्ध में शनिदेव को पराजित करके और घायल कर दिया गया था. इतना ही नहीं बाद में मेघनाथ ने शनिदेव को बंदी बनाकर अपने महल में रखा हुआ था. लंका दहन के दौरान जब हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगाई थी. उसे समय एक जगह पर उन्होंने शनि देव को कमरे में बंधी बनाया हुआ देखा।
इसके पश्चात हनुमान जी ने शनिदेव के दर्द को कम करने के लिए पास में रखा हुआ सरसों का तेल शनिदेव को लगाया. इससे उन्हें दर्द में आराम मिला और वह शीघ्र ही स्वस्थ हो चुके थे. तभी से आज तक शनि देव जी को जो कोई तेल चढ़ता है तो वह उनको अत्यधिक क्रिया होता है. आमतौर पर शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाया जाता है लेकिन आप तिल का भी दिल चढ़ा सकते हैं.
शनि देव को तेल चढ़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण
अगर धार्मिक कारण के अलावा वैज्ञानिक कारण की बात करें तो शनि देव जी को तेल चढ़ाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण यह है कि हम सब देखते हैं कि सरसों का तेल एक औषधीय गुणों से भरपूर होता है. इसी वजह से यह किसी व्यक्ति के ब्लड सरकुलेशन यानी कि रक्त संचार को बेहतर बना करने के लिए या जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के लिए महत्वपूर्ण होता है.
इसी वजह से हनुमान जी ने भी शनिदेव को सरसों का तेल घायल अवस्था में लगाया था. इसके बाद से शनि देव को सरसों का तेल अत्यधिक प्रिय है. और यह किसी व्यक्ति की घायल शरीर पर लगाने से उसको राहत देता है. जिसके कारण घायल व्यक्ति स्वीकृति स्वस्थ हो जाने में मदद मिलती है. तभी से शनि देव की पूजा के अवसर पर उन्हें तेल चढ़ाया जाता है. शनि देव की पूजा करने के दौरान आप लोग ओम शनि देवाय नमः मंत्र का जाप कर सकते हैं. अगर आप शनिदेव की पूजा करते हैं तो ध्यान रखें कि उनकी आंखों में आंखें डालकर बिल्कुल भी ना देखें. इसके पीछे भी एक कारण है.





