जीण माता का मंदिर कहाँ है तथा इनकी क्या कहानी है?

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Jeen Mata Ka Mandir – आज हम इस आर्टिकल में मां भवानी के एक जीन माता मंदिर के बारे में बात करने वाले हैं. यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के अंतर्गत आता है जो की खाटू श्याम मंदिर से लगभग 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. जबकि जयपुर से इसकी दूरी करीब 115 किलोमीटर है. ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जीण माता का मंदिर का इतिहास बेहद ही चमत्कारी रहा है.

जीण माता का मंदिर कहाँ है तथा इनकी क्या कहानी है

मान्यताओं के मुताबिक यहां का काजल आंखों में लगाने के बाद व्यक्ति का नेत्र रोग समाप्त हो जाता है. यह भी माना जाता है कि इस चमत्कारी मंदिर पर जीण माता ने तपस्या की थी और आज भी यहां पर अखंड दिव्य जोत जल रही है. अगर आप इस मंदिर के बारे में जानना चाहते हैं तो इस पूरे आर्टिकल को पढ़िए और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करिए.

जीण माता का मंदिर

राजस्थान के सीकर जिले के अंतर्गत आने वाले जीण माता का मंदिर भी काफी प्रसिद्ध हो रहा है खाटू श्याम के बाद लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए भी जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर जीण माता ने तपस्या की थी जिसके बाद से ही यह मंदिर चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है क्योंकि इसका काजल लगाने से किसी भी व्यक्ति का नेत्र रोग ठीक हो जाता है ऐसी मान्यता रही है. मंदिर के पंडित जी बताते हैं कि आज भी यहां जीण माता के द्वारा जुलाई गई जोत जल रही है। तो अगर आप भी खाटू श्याम के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं तो इस मंदिर पर माता के दर्शन करना तो स्वाभाविक है.

भाई बहन के अटूट प्रेम की है कहानी

इतिहासकारों और लोक कथाओं के अनुसार यह मंदिर काजल शिखर नामक एक पहाड़ पर स्थित है. इस मंदिर के पीछे भाई – बहन की अटूट प्रेम की कहानी भी है. लोक कथाओं के अनुसार दसवीं सदी में चुरू जिले के घान्घू नामक गांव में राजा गंगा सिंह राज करते थे जो मां भवानी के बहुत बड़े भक्तों में से एक रहे हैं. माता के वरदान के बाद उन्हें एक धर्मपत्नी मिली.

लेकिन किसी कारण बस वह रानी राजा को छोड़कर चली जाती है इसके बाद राजा भी अपने प्राण त्याग देते हैं. इस राजा के पुत्र हर्षनाथ और जीवन भाई बहन थे. इन दोनों के बीच अटूट प्रेम था. हर्षनाथ की भी शादी हो जाती है जिसके बाद जीवण की भाभी को भाई बहन का यह रिश्ता और प्रेम पसंद नहीं आता है.

एक षड्यंत्र के चलते हर्षनाथ अपनी बहन की बातों पर विश्वास ना करते हुए अपनी पत्नी की बातों पर विश्वास कर लेता है. इसके बाद दुखी होकर बहन जीवण अरावली पहाड़ियों पर चली जाती है. और इसके बाद यह काजल शिखर नाम की एक पहाड़ी पर आकर बैठ जाती है।‌

यहां पर अत्यंत दुख के साथ रोने लगती है और बताया जाता है कि इनकी रोने की वजह से आंसुओं से ही पूरा पहाड़ भीग गया था। तत्पश्चात यहां पर उन्होंने तपस्या भी की और इसके बाद ही इस मंदिर का नाम जीण माता मंदिर रखा गया. मंदिर की निकट की एक हर्षनाथ उनके भाई का मंदिर भी है, जो कि अपनी बहन को घर ले जाने के लिए आए थे लेकिन उनकी बहन घर नहीं गई. दोनों मंदिर स्थानीय लोगों में बहुत ही अधिक प्रसिद्ध है.

औरंगजेब से भी जुड़ा है इतिहास

जानकारी के मुताबिक यह मंदिर पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में बनाया गया था जो कि करीब 1000 से 1200 साल पुराना माना जाता है. इस मंदिर का इतिहास औरंगजेब से भी जुड़ा है इसे मधुमक्खियां की देवी (भंवरो वाली देवी) के नाम से भी जाना जाता है. जानकारी के मुताबिक औरंगजेब ने जब इस मंदिर पर हमला किया था.

तब मां जीण भवानी की कृपा से भंवरों ने ही औरंगजेब की सेवा को वहां से भगा दिया था. इसके बाद इस मंदिर की महिमा को देखते हुए औरंगजेब भी माता के दर्शन करने के लिए पैदल गया और एक अखंड दीपक जलाया था. नवरात्रों में भी यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और मेले का आयोजन भी किया जाता है.

काजल लगाने की है मान्यता

जीण माता मंदिर के पीछे मान्यता यह भी है की दिव्य ज्योति में से बनने वाले काजल को अगर किसी नेत्र रोगी व्यक्ति की आंखों में लगा दिया जाए तो उसका नेत्र रोग ठीक हो जाता है.

डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल में दी समस्या जानकारी धार्मिक मान्यता और लोक कथाओं के आधार पर दी गई है. अतः इस जानकारी की पुष्टि हम नहीं करते हैं.