
नई दिल्ली । प्राण प्रतिष्ठा एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में अगर जितना ज्यादा समझा जाए उतना ही काम रहता है. जब भी सनातन धर्म में किसी भी मंदिर की स्थापना होती है तो वहां पर मूर्ति स्थापित करने से पहले उसके लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है. इन मंत्रों में इतनी ज्यादा शक्ति होती है कि उनकी मदद से उसे एक साधारण थी भगवान की मूर्ति में देवीय ऊर्जा का संचार होने लगता है। इस जैविक ऊर्जा के कारण ही जब मूर्ति के सामने प्राण प्रतिष्ठा की अंतिम प्रक्रिया के दौरान दर्पण लाया जाता है तो वह टूट जाता है। आईए इस पूरी प्रक्रिया के बारे में और भी विस्तार से जानते हैं।
प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मूर्ति के सामने रखा हुआ दर्पण क्यों टूट जाता है ?
22 जनवरी को अयोध्या में रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह इधर चल ही रहा है तो लोगों के मन में अभी भी कई सारे प्रकार के सवाल आते रहते हैं जिनको सनातन धर्म के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है लेकिन हम आपके लिए बता देना चाहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा की इस प्रक्रिया को कई स्टेप में पूरा किया जाता है। सबसे पहले तो उस ईश्वर का आह्वान मंत्रों के माध्यम से किया जाता है जिसकी मूर्ति की स्थापित की जा रही है। और इसकी सबसे अंतिम स्टेप (नेत्र उन्मीलन) होता है, जिसमें ईश्वर के सामने आंखों पर पट्टी बंधी होती है और उसे पट्टी को खोलते वक्त दर्पण को भगवान की मूर्ति के सामने रखा जाता है, तो इसके बाद दर्पण अचानक से टूट जाता है इसके पीछे का कारण क्या है? आईए जानते हैं।
क्यों टूट जाता है प्राण प्रतिष्ठा के दौरान दर्पण
दरअसल प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मंदिर में मूर्ति स्थापित करने से पहले मूर्ति की आंखों पर पट्टी बांधी जाती है और मंत्रों का जाप करके शास्त्रों के अनुसार पूरी विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद जब प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआती स्टेप पूरी हो जाती है तो इसके अंतिम चरण को नेत्र उन्मीलन के नाम से जाना जाता है. इसमें भगवान को आंखों की पट्टी खोलने से पहले और खुद का ही चेहरा दिखाया जाता है इसलिए उनके सामने दर्पण रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान को उनका चेहरा इसलिए दिखाया जाता है ।
क्योंकि उनमें मंत्रों का जाप करने की वजह से दैवीय शक्तियों का वास हो जाता है। यह शक्ति इतनी अधिक होती है कि अगर कोई व्यक्ति इसे देख लेता है तो उसके साथ कुछ भी हो सकता है। इसलिए दर्पण में उसे मूर्ति का स्वरूप हुई उनको (ईश्वर) दिखाया जाता है और दर्पण टूट जाता है। अगर दर्पण नहीं टूटता है तो इसका सीधा सा मतलब यह है कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान कुछ ना कुछ गलती हुई है या प्राण प्रतिष्ठा का समारोह शास्त्रों के अनुसार कुछ सही नहीं हुआ है।
क्या है दर्पण टूटने का वैज्ञानिक कारण ?
नेत्र उन्मीलन की क्रिया के दौरान जब दर्पण टूट जाता है इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह हो सकता है कि मंत्रों के उच्चारण की वजह से तरंगों के रूप में एक सकारात्मक ऊर्जा उस मूर्ति में स्थापित हो जाती है. किसी भी आम इंसान में इतनी शक्ति नहीं होती है कि वह उसे ऊर्जा का सामना कर सके इसलिए दर्पण को मूर्ति के सामने रखा जाता है यही इसके पीछे का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण है। क्योंकि सभी मंत्रों को उच्चारण करते वक्त उनको एक लय में पढ़ा जाता है। मंत्रों में इतनी शक्ति होती है कि यह बिन मौसम बरसात भी करवा सकते हैं।
डिस्क्लेमर : यहां दी गई समस्या जानकारी केवल मान्यताओं के आधार पर दी गई है. इसके सही होने की पुष्टि हम या हमारी टीम बिल्कुल भी नहीं करते हैं. किसी भी शब्द पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.




