नासा के वैज्ञानिकों ने किया दावा, 2030 तक चांद पर घर बनाएंगे इंसान

साइंस न्यूज़ : अभी एक खबर सामने निकल कर आ रही है जिसमें बताया जा रहा है कि नासा के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि साल 2023 के अंत में चंद्रमा पर इंसानियत बस्तियां बसना शुरू हो जाएंगी | 

नासा के वैज्ञानिकों ने किया दावा, 2030 तक चांद पर घर बनाएंगे इंसान

जी हां दोस्तों आपने सही पढ़ा है ! नासा के वैज्ञानिक ने दावा किया है कि साल 2023 के अंत तक यानी कि इस दशक के अंत में मानव सभ्यता को चांद पर बसाया जा सकता है | यह सब जानकारी नासा के एक वैज्ञानिक ओरिजिन अंतरिक्ष यान अभियान का नेतृत्व कर रहे हावर्ड हू बताया है | 

2030 तक चंद्रमा पर बसेगी मानव सभ्यता 

इस दशक के अंत में अर्थात 2030 तक मानव सभ्यता यानी मानव की बस्तियों को पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा पर बसाया जा सकता है | ऐसा नासा के एक वैज्ञानिक हावर्ड हू ने बताया है | दरअसल यह वैज्ञानिक नासा के ओरियन अंतरिक्ष यान अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं | 

वैज्ञानिक हावर्ड हू बताया कि साल 2030 से पहले ही मानव बस्तियां चांद पर बस सकती है | मानव बस्तियों को चांद पर बस आने में सहयोग करने के लिए वहां पर रोवर्स तैनात किए जाएंगे | यह रॉबर्स समस्त ह्यूमन सिविलाइजेशन अर्थात मानव सभ्यता की मदद करेंगे | जिससे दुनिया भर के वैज्ञानिकों का चांद पर रहने का सपना पूरा हो जाएगा | 

वैज्ञानिक हावर्ड हू का बयान 

नासा के ओरियन अंतरिक्ष यान अभियान का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक हावर्ड हू का कहना है कि हम चांद की धरती पर इंसानों को भेजेंगे | जल्द ही मानव सभ्यता चांद के वातावरण में ढल जाएगी | बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक नासा के मून मिशन के तहत आर्टेमिस रॉकेट के जरिए ओरियन स्पेसक्राफ्ट भैया जाएगा | 

जोकि इंसान के अंतरिक्ष में उड़ान के लिए एक ऐतिहासिक पल हो जाएगा | साथ ही में वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि अगर नासा का यह मिशन सक्सेस होता है तो फिर इसके बाद आर्टेमिस टू और थ्री को भी चंद्रमा पर भेजा जाएगा | जिसमें चंद्रमा पर घूमने की इच्छा रखने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा | 

50 साल बाद नासा ने शुरू किया मून मिशन 

आपको बता दें कि नासा ने साल 1972 में अपोलो-17 मिशन के बाद अभी तक कोई भी मिशन चंद्रमा के लिए नहीं भेजा था | लेकिन अब इस साल अमेरिका की नासा ने पिछले बुधवार को आर्टेमिस -1 मिशन को चंद्रमा पर लांच किया | 

इस स्पेसक्राफ्ट में किसी भी प्रकार का कोई चालक दल नासा की तरफ से नहीं भेजा गया है | यह एक परीक्षण स्पेसक्राफ्ट होने वाला है, जो कि करीब 42 दिन बाद 11 दिसंबर को चंद्रमा का परीक्षण कर पृथ्वी पर लौटेगा | नासा का 1972 का अपोलो 17 मिशन चांद पर नहीं पहुंच पाया था | लेकिन अब देखते हैं कि नासा का यह मिशन चांद पर पहुंचकर परीक्षण कर पाता है या नहीं |