शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों रखा जाता है? | शरद पूर्णिमा का महत्व

शरद पूर्णिमा के : दोस्तों अगर आप भी शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों किया जाता है ?, शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है ? या फिर शरद पूर्णिमा का क्या महत्व

शरद पूर्णिमा : दोस्तों अगर आप भी शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों किया जाता है ?, शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है ? या फिर शरद पूर्णिमा का क्या महत्व है ? इस प्रकार के सवाल के बारे में जानना चाहते हैं तो आप एकदम सही पोस्ट पढ़ रहे हैं | इस पोस्ट में हम आपको शरद पूर्णिमा के संबंधित समस्त जानकारी देने वाले हैं |

शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों रखा जाता है? | शरद पूर्णिमा का महत्व

हिंदुओं में शरद पूर्णिमा का अत्यधिक महत्व माना जाता है | हिंदू पंचांग के अनुसार आज ही के दिन 9 अक्टूबर 2022 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही शरद पूर्णिमा के नाम से हिंदू संस्कृति में जाना जाता है | आपको बता दें कि शरद पूर्णिमा हर साल एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है | जिसमें कई महिलाएं व्रत रखकर चंद्रमा की तथा तुलसी की पूजा करती हैं | 

शरद पूर्णिमा की जानकारी 

प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाली पूर्णिमा को ही शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है | इस साल शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर 2022 को है, जिस दिन समस्त हिंदू महिलाएं पूर्णिमा का व्रत रखने के बाद तुलसी की पूजा करती हैं | हिंदू संस्कृति तथा पुराणों में शरद पूर्णिमा को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है | ऐसा भी माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा की सभी 16 कला एक साथ होती हैं | 

शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों किया जाता है ?

दोस्तों अगर आपके मन में यह सवाल उठ रहा है कि शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों किया जाता है ? तो इसका जवाब देने से पहले मैं आपको बता दूं कि हिंदू धर्म में कई सारे व्रत पड़ते हैं | जिनमें से प्रत्येक व्रत का महत्व अलग अलग होता है |:व्रत करने के साथ उसकी पूजा विधि भी अलग-अलग होती है | 

चलिए अब बताते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन व्रत क्यों किया जाता है ? - आपको बता दूं कि शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा तथा कोमोदी व्रत के नाम से भी हिंदू धर्म में जाना जाता है | इस दिन हिंदू धर्म के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी माता प्रकट हुई थी | 

लक्ष्मी माता की पूजा विधिवत तरीके से करके सुख समृद्धि और वैभव के साथ धन की प्राप्ति भी, शरद पूर्णिमा के व्रत को करने से प्राप्त होती है | यही एक वजह है कि हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को अत्यधिक महत्व दिया जाता है | इसीलिए शरद पूर्णिमा के दिन हिंदू धर्म की महिलाएं माता लक्ष्मी की पूजा करती हैं और व्रत भी रखती हैं | इस दिन व्रत रखने के पीछे का कारण यह है कि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत रखा जाता है | 

शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों बनाई जाती है ? 

दोस्तों अगर आपको पता नहीं है कि- शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों बनाई जाती है ? तो मैं आपको बता दूं कि हिंदू महिलाएं शरद पूर्णिमा पर रात को खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखती हैं | जैसा कि हमने आपको बताया है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सभी कलाओं संयुक्त होकर अपनी रोशनी बिखेरता है | 

अगर चंद्रमा की रोशनी आप की खीर पर पड़ जाती है तो इससे माना जाता है कि चंद्रमा ने आपके द्वारा लगाई गई इस खीर का भोग कर लिया है | अब आप सभी प्रसाद के तौर पर इस खीर का सेवन कर सकते हैं | तथा कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि शरद पूर्णिमा के दिन समुद्र मंथन हुआ था | तो इस दिन आसमान से अमृत टपकता है | और इसे आप प्रसाद के तौर पर खा सकते हैं | 

पूजा करने की विधि और मुहूर्त 

चलिए दोस्तों अब हम आपको शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा करने की विधि के बारे में बताते हैं | इस दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए | इसके बाद आप अपने आराध्य भगवान को स्नान कराकर उन्हें नए वस्त्र आभूषण इत्यादि पहनाए | जिसके बाद आपको गाय के दूध से बनी हुई खीर को आराध्य को चढ़ाना है | 

अब आपको रात में चंद्रमा की रोशनी में खुले मैदान में उस खीर को बिना किसी से ढके हुए चंद्रदेव की रोशनी में रखना है | जिसके बाद आपको सुबह के समय इस खीर को उठाना है | अगले दिन सुबह इस खीर को प्रसाद के तौर पर आप भी खाएं तथा सभी घर में मौजूद सदस्यों को खिलाएं| जिस दिन आप शरद पूर्णिमा की कथा भी सुन सकते हैं | 

शरद पूर्णिमा के दिन पूजा का मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:40 AM से 05:29 AM    
  • अभिजित मुहूर्त- 11:45 AM से 12:31 PM
  • निशिता मुहूर्त- 11:44 PM से 10 अक्टूबर  12:33 AM 
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:46 PM से 06:10 PM
  • अमृत काल- 11:42 PM से 01:15 PM
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:18 AM से 04:21 PM 
(मुहूर्त क्रेडिट - आजतक हिंदी न्यूज़ वेबसाइट )