Vishwakarma Jayanti 2022 : विश्वकर्मा जयंती क्यों मनाई जाती है ?

Vishwakarma Jayanti 2022 : बढ़ई और ओझा जाति के लोग भगवान विश्वकर्मा कि इस जयंती को बहुत ही धूमधाम से 17 सितंबर को मनाते हैं |

Vishwakarma Jayanti 2022 : बढ़ई और ओझा जाति के लोग भगवान विश्वकर्मा कि इस जयंती को बहुत ही धूमधाम से 17 सितंबर को मनाते हैं | विश्वकर्मा जी पौराणिक कथाओं के अनुसार पूरे ब्रह्मांड के सबसे प्रतिष्ठित और अद्भुत शिल्पकार और कारीगर के रूप में जाने जाते हैं | रावण की लंका भी भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा ही बनाई गई थी | 

Vishwakarma Jayanti 2022

इतने महान शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती को समस्त बढ़ई जाति के लोग इतनी धूमधाम से मनाते हैं कि इस दिन रहे विश्वकर्मा जी की रैली भी निकालते हैं | अपने पूरे गांव शहर में घुमाते हुए प्रोग्राम भी आयोजित किए जाते हैं | ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी के साथ देवपुत्र विश्वकर्मा जी बृहस्पति जी की बहन भुवना के पुत्र के रूप में जाने जाते हैं | 

विश्वकर्मा जयंती 2022 

इस साल 17 दिसंबर 2022 को विश्वकर्मा जयंती बड़े ही धूमधाम से बढ़ई जाति के लोगों के द्वारा मनाया जा रहा है | इस अवसर के दिन समस्त बड़े और और जाति के लोग ब्रह्मा जी को एक तस्वीर को विमान में बिठाकर अपने पूरे शहर में घूमाते हैं | इस प्रकार कई कई जगह पर दो इस दिन प्रोग्राम भी आयोजित किए जाते हैं | 

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा जी पौराणिक काल में एक इंजीनियर अर्थात शिल्पकार थे | जिन्हें रावण की सोने की भव्य लंका के निर्माण का श्रेय भी दिया जाता है | ऐसा माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने पर उनके भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ-साथ उनके व्यापार और उद्योग में भी तरक्की हो जाती है | 

विश्वकर्मा जयंती क्यों मनाई जाती है ? 

दोस्तों अगर आपके मन में यह सवाल उठ रहा है कि विश्वकर्मा जयंती क्यों मनाई जाती है ? ठीक उसी तरह हर धर्म में अपने अपने धर्म के लोग अपने अपने देवता की जयंती के अवसर पर पूजा उपासना करते हैं, ठीक इसी प्रकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर विश्वकर्मा जी की पूजा अर्चना करके उनकी जयंती मनाई जाती है | जिससे कि किसी व्यापारी के व्यापार में और उन्नति हो सके | 

विश्वकर्मा जी की पूजा का शुभ मुहूर्त 

दोस्तों अगर आप भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको शुभ मुहूर्त में रहकर पूजा करना चाहिए | हिंदू धर्म के ग्रंथों के अनुसार शुभ मुहूर्त में पूजा करने से हमारा हर काम शुभ होता है, इतना ही नहीं इसे हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है| अगर हम इस साल भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा का शुभ मुहूर्त की बात करें तो हिंदू पंचांग के अनुसार -विश्वकर्मा जी की जयंती पर सुबह 7:35 से सुबह के ही 9:10 तक पूजा का शुभ मुहूर्त है | 

अगर आप सुबह पूजा किसी कारणवश नहीं कर पाते हैं तो इसके अलावा आपको पूजा करने के दो अवसर और मिलते हैं | इसके बाद आपको दोपहर में 1:45 से दोपहर के 3:20 तक शुभ मुहूर्त है | इसके अलावा शाम को 3:20 से 4:53 तक शुभ मुहूर्त चालू होता है | अगर आप इस शम्मा व्रत में भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती के अवसर पर उनकी पूजा करते हैं तो आपके हर काम शुरू होंगे | 

विश्वकर्मा जी की पूजा करने की विधि 

भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती के अवसर पर अगर आप उनकी पूजा विधि के अनुसार नहीं करते हैं, तो हो सकता है कि आपके साथ कुछ अनहोनी हो जाए | इसलिए आपको हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार किसी भी देवी देवता या भगवान की पूजा को पूजा विधि के अनुसार ही करना चाहिए | भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा विधि पौराणिक कथाओं में निम्नानुसार बताई गई है - 

जब भी आप भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के लिए जाते हैं तब आपको सबसे पहले सुबह के समय में स्नान करने के बाद ही स्वच्छ और कोरे वस्त्र धारण करने जरूरी है | उसके बाद अब अपने सच्चे मन श्रद्धा भाव से अपने घर में या दुकान और व्यापार में उपस्थित औजार इत्यादि जरूरत के सामान को सफाई करने के बाद एक जगह रखकर भगवान विश्वकर्मा जी की तस्वीर लगा कर पूजा करना चाहिए | आप पूजा में प्रसाद के लिए मेवा मिष्ठान और नारियल भी ले सकते हैं | 

पूजा करते वक्त आपको अपने समस्त व्यापार में उपयोग किए जाने वाले औजारों में आठवीं बांधकर और उन्हें प्रसाद चढ़ाने के बाद भगवान विश्वकर्मा जी का ध्यान लगाते हुए "ॐ विश्वकर्मणे नमः" का जाप करते हुए पूजा करना है | पूजा समाप्त होने के बाद भगवान विश्वकर्मा जी के प्रसाद को सभी लोगों में वितरित करें | ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आपकी व्यापार में तरक्की होती है |