हैप्पी बर्थडे भगत सिंह : भारत के महान क्रांतिकारी सिंह की जयंती पर जानिए उनके बारे में रोचक जानकारी

हैप्पी बर्थडे भगत सिंह : भारत के महान क्रांतिकारी सिंह की जयंती पर जानिए उनके बारे में रोचक जानकारी

हैप्पी बर्थडे भगत सिंह : पंजाब के रहने वाले तथा भारत के महान क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंती पर INshortkhabar की तरफ से शत शत नमन | आइए भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हम उनके बारे में कुछ रोचक जानकारी जानते हैं जिससे कि आपको भी देश भक्ति से जुड़े भगत सिंह के बारे में कुछ और नया जानने को मिले |

हैप्पी बर्थडे भगत सिंह : भारत के महान क्रांतिकारी सिंह की जयंती पर जानिए उनके बारे में रोचक जानकारी

भगत सिंह की जयंती के अवसर पर देशभर के समस्त लोग भगत सिंह को अपने व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भर भर के श्रद्धांजलि दे रहे हैं | इससे पता लगता है कि भगत सिंह का स्थान लोगों के जरूर में क्या है ? जानकारी के मुताबिक नाम से भगत सिंह, परंतु वास्तव में उन्हें ईश्वर में विश्वास नहीं था | ऐसा कुछ कारणों की वजह से हुआ जिनको नीचे हमने बताया है | 

हैप्पी बर्थडे शहीद भगत सिंह 

जब भारत की आजादी के लिए देश भर के युवा भगत सिंह के साथ जोड़कर क्रांतिकारी राई में सहयोग कर रहे थे, उसी समय महात्मा गांधी और उनके साथी अन्य पार्टी के लोग भगत सिंह जैसे सच्चे क्रांतिकारी देशभक्त को भला बुरा कह रहे होते हैं | आज ऐसे ही क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंती है 28 सितंबर 2022 को | 

दरअसल महात्मा गांधी अहिंसावादी थे | अतः उनकी विचारधारा थी कि वह किसी भी काम को करवाने के लिए हिंसा से नहीं बल्कि अहिंसा से लड़ाई करेंगे | लेकिन यह ज्यादा सफल नहीं रहा | अपनी अपनी विचारधारा के साथ आगे बढ़ते हुए अपने कार्य में भगत सिंह ने अपनी जान दे दी, और वह हमेशा के लिए देश के नागरिकों के ह्रदय में अमर हो गए | 

हालांकि आपको बता दें कि भगत सिंह के साथ उनके साथी राजगुरु और सुखदेव को भी अंग्रेज जस्टिस के द्वारा फांसी की सजा दी गई थी | भगत सिंह एक क्रांतिकारी विचारधारा के थे, इस वजह से ही उन्होंने क्रांतिकारी तरीके से ही आजादी को हासिल करना सही समझा | शुरुआती टाइम में जब भगत सिंह छोटे थे, वह महात्मा गांधी की विचारधारा और कार्यों से अत्याधिक प्रभावित थे | 

लेकिन उनकी विचारधारा उस समय बदल गई, जब जनरल डायर ने जालियांवाला बाग में कई सारे लोगों पर गोलियां चलाने का हुकुम दे दिया था | उसमें ना जाने कितने लोग ऐसे ही बिना किसी कसूर के मारे गए थे | कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बाग में मौजूद कुएं में भी कूद गए थे | ऐसी दर्दनाक घटना की वजह से भगत सिंह का हृदय परिवर्तन हो कर एक क्रांतिकारी विचारधारा की तरफ मुड़ गया | 

देशभक्ति मेरा धर्म है 

देशभक्ति मेरा धर्म है ऐसा मानना था भारत के एक शहीद भगत सिंह का | दरअसल नंदकिशोर मेहता के द्वारा भगतसिंह से एक सवाल पूछा गया था, कि तुम क्या करते हो, तो भगत सिंह ने इसका जवाब दिया कि मैं बंदूके बेचता हूं | इसके बाद उन्होंने दूसरा सवाल किया कि तुम्हारा धर्म क्या है ? तब भगत सिंह ने बताया कि- मेरा धर्म देशभक्ति है | ऐसे महान विचारों वाले थे देशभक्त भगत सिंह |