Vat Savitri Vrat [Hindi] 2022 : अगर वट सावित्री का व्रत पहली बार रख रही है तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा |

Vat Savitri Vrat [Hindi] 2022 : अगर वट शिवरात्रि का व्रत पहली बार रख रही है तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा |

बट सावित्री पूजा 2022 : अगर आप हिंदू धर्म से संबंधित हैं और बट सावित्री पूजा के व्रत को साल 2022 में रखना चाहती हैं | 

इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं कि आपको बट सावित्री पूजा के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए | बट सावित्री पूजा का हिंदू धर्म में क्या महत्व है | इन सब पॉइंट्स का वहीं हम किस में कवर करेंगे | 

Vat Savitri Vrat [Hindi] 2022 : अगर वट सावित्री का व्रत पहली बार रख रही है तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा |

हेलो दोस्तों ! स्वागत है आपका, INshortkhabar.com की एक नई पोस्ट में | आपकी इस पोस्ट में हम आपको बट सावित्री पूजा के व्रत के बारे में जानकारी प्रदान करने वाले है, अगर आप भी बट सावित्री पूजा के इस व्रत को विधिपूर्वक करना चाहती है तो इस पोस्ट को आप पूरा पढ़ सकती हैं | 

बट सावित्री पूजा के बारे में जानकारी 

हम आपको बता देना चाहते हैं कि बट सावित्री पूजा का जो व्रत होता है वह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को किया जाता है | 

यह व्रत भी करवा चौथ की व्रत की जैसे पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है | अर्थात जो स्त्री सुहागिनें होती हैं वह अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को विधिवत पूरा करती है | 

वट सावित्री की पूजा में सभी सुहागिनी स्त्री अपने पति की लंबी उम्र के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती है | साल 2022 में वट सावित्री की पूजा का व्रत 30 मई को मनाया जा रहा है | 

दोस्तों हमें इस आर्टिकल को लिखते वक्त एक Joke याद आ रहा है | इस joke के माध्यम से हम आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं चाहते | परंतु हम आपको यह जोक बताना जरूर चाहते हैं | 

"एक तरफ तो बीवियां घर में रहते हुए जीने नहीं देती,

करवा चौथ और वट सावित्री का व्रत रखने के बाद जल्दी मरने भी नहीं देती है | " 

यह जोक कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रहा था | इस चुटकुले के माध्यम से हम आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं चाहते | परंतु आपके चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कान इस चुटकुले के माध्यम से जरूर आ सकती है | 

बट सावित्री व्रत के पीछे की कहानी क्या है ? 

दोस्तों हम आपको बता देना चाहते हैं कि बट सावित्री का वृक्ष हिंदू धर्म में काफी समय से चला आ रहा है | इस व्रत के पीछे कहानी यह है कि, बहुत समय पहले एक सावित्री नाम की स्त्री की शादी एक लकड़हारे के साथ हुई थी | एक दिन जब वह लकड़हारा अपनी शादी के बाद जंगलों में लकड़ी काटने के लिए जा रहा था | 

लकड़िया काटते वक्त सावित्री के पति जिनका नाम सत्यवान है, किसी कारण बस अचानक उनकी मौत हो जाती है | जिस दिन उनकी मौत होती है उसी दिन सावित्री भी अपने पति के साथ जंगल में लकड़ियां काटने के लिए जाती है | 

जैसे ही सावित्री को पता चलता है कि उनके पति ने कि अचानक किसी कारणवश मौत हो गई है | तो है उनके पर लाने के लिए अथक प्रयास करती है | पौराणिक कथाओं में तो यह भी कहा जाता है कि यह सावित्री ने यमराज से भी अपने पति के प्राण लाने के लिए बहस की थी | और वह स्त्री यमराज के पीछे पीछे तक यमलोक चली गई थी | 

अंत में यमराज ने थक हार कर सत्यवान यानी कि सावित्री के पति के प्राण उसे वापस देने पड़े | इसके अलावा यमराज ने खुश होकर सावित्री को कुछ वरदान भी दिए थे | आपको बता दें कि सावित्री के सास और ससुर अंधे थे | तब सावित्री ने यमराज से अपने सास-ससुर के लिए आंखों की ज्योति भी वापस मांगी थी | 

सावित्री ने बड़ी चालाकी से अपने ससुर जी का खोया हुआ साम्राज्य भी वापस ले लिया था | और तभी से यह बट सावित्री पूजा का व्रत किया जा रहा है | और हर हिंदू नारी जो कि इस पूजा में दिल से और मन से विश्वास रखकर पूजा करती है, कहते हैं कि उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है | 

बट सावित्री पूजा के व्रत के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? 

हम आपको बता देते हैं कि, अगर आप बट सावित्री पूजा का व्रत रखना चाहते हैं तो आपको किन किन बातों का ध्यान रखना होगा | और इस पूजा को करने के लिए विधि क्या होती है | 

बट सावित्री पूजा के दिन महिलाओं को काली सफेद और नीले रंग के वस्त्र के साथ चूड़ियां भी नहीं पहननी चाहिए | 

अगर कोई महिला वट सावित्री का व्रत पहली बार कर रही हैं तो उसे इस व्रत की शुरुआत अपने मायके से ही करनी चाहिए | इसके अलावा उस स्त्री को अपने सुहाग की सामग्री को मायके में ही इस्तेमाल कर लेना चाहिए | 

बट सावित्री पूजा की विधि 

बट सावित्री पूजा के व्रत को आप तो तरीके से कर सकती है | इतने भी करवा चौथ के व्रत की तरह पूजा के बाद आप फल खाकर भी कर सकती हैं | और दूसरे तरीके में आप बरगद के वृक्ष पर चढ़ाए जाने वाली खाद्य सामग्री का सेवन करके भी कर सकती है | 

  • वट वृक्ष की पूजा में आप भरत के वृक्ष के चारों ओर जल चढ़ाने के बाद एक कच्चा सूत लपेटकर आरती करते हैं | 
  • इसमें दीपक जलाने के बाद खाद्य सामग्री जैसे फल फूल मिठाई आदि बट वृक्ष को चढ़ाते हैं | 
  • इसमें भगवान विष्णु का भी ध्यान किया जाता है | और सभी व्रत करने वाली स्त्रियां सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण कर दी है | 
  • इस दिन एक बच्ची लगाकर पर्यावरण संरक्षण को भी महत्व दिया जाता है | 
  • दोस्तों आपको बता दें कि वट वृक्ष की पूजा भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में, अलग-अलग दिन को की जाने वाली है | उत्तर भारत में यह 30 मई को मनाएंगे‌ | 

आज आपने क्या न्यूज़ पढ़ी ?

दोस्तों आपको आज की इस पोस्ट में हमने बट सावित्री के पूजा की विधि और इसके महत्व के बारे में बताया है | अगर आप एक सोने मिस्त्री है तो आपके लिए यह पोस्ट बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाली है | उम्मीद करते हैं कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी | 

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई है तो आप इसे अपने उन सगे संबंधी उसे जरूर शेयर करें जो कि इस पूजा में Interested हो | 

इसके अलावा आप हमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे कि फेसबुक इंस्टाग्राम टि्वटर पर भी फॉलो कर सकते है | वहां पर हम रोजाना ऐसा ही कंटेंट शेयर करते रहते हैं जिससे आपकी नॉलेज बढ़ती रहे |