Love Hostel Movie 2022 : Love Hostel Movie Review & Story in Hindi | Latest Bollywood Movie in Hindi 2022

Love Hostel Movie 2022 : Love Hostel Movie Review & Story in Hindi | Latest Bollywood Movie in Hindi 2022

Love Hostel Movie 2022 ( लव हॉस्टल का रिव्यू ) 

हेलो दोस्तों ! अगर आप भी बॉलीवुड मूवी लव हॉस्टल का रिव्यू (Love Hostel Movie 2022)  देखना चाहते हैं या फिर इस स्टोरी ( Love Hostel Movie Review & Story) जानना चाहते हैं तो आज हम लव स्टोरी मूवी की स्टोरी ( Love Hostel Movie Story ) को जानने वाले हैं | 

Love Hostel Movie 2022 : Love Hostel Movie Review & Story in Hindi | Latest Bollywood Movie in Hindi 2022
(img Source : Google ) 

लव हॉस्टल मूवी ( Love Hostel Movie ) जो कि सुनने में काफी रोमांचक लगती है तो उतना ही रोमांचक इसकी स्टोरी भी है | अगर हम लव हॉस्टल मूवी  ( Love Hostel Movie ) की बात करें तो वैसे तो यह हरियाणा की भूमि की कहानी है | वैसे तो यह कहानी वह कपल्स ( Couples ) के लिए है जो अपने घर से भागकर शादी करते हैं | यह फिल्म लगभग डेढ़ घंटे की बनाई गई है अर्थात इस फिल्म को देखने के लिए आपको केवल डेढ़ घंटे ही लगेंगे | 

Love Hostel (लव हॉस्टल मूवी) के हीरो विक्रांत मैसी है जो कि इस फिल्म में काफी अच्छा रोल प्ले करते हैं | विक्रांत मैसी वैसे तो कई सारी फिल्मों में काम कर चुके हैं | परंतु इस फिल्म में उनका कैरेक्टर ही चेंज हो गया है | इस फिल्म में अगर आप कुछ नया सीख सकते हैं तो वह यह है कि आप अपनी प्रेमिका को घर से भगा कर शादी करना है जो कि एक इसके लिए बनाए गए 'शेल्टर होम ' है | 

Love Hostel Movie 2022 : Love Hostel Movie Review & Story in Hindi | Latest Bollywood Movie in Hindi 2022

Love Hostel फिल्म में सरकार द्वारा 'शेल्टर होम ' को घर से भाग कर शादी करने वाले जोड़ों के लिए बनाया गया है जिससे कि उनको इस 'शेल्टर होम ' में पूरी तरीके से सुरक्षा प्रदान की जा सके जोकि अपने प्रेमिका को भगा कर लाए हैं | इस फिल्म को बनाने वाले निर्देशक अगर इस फिल्म की कहानी के अंजाम को सोच कर ही रोना आ जाता है वैसे तो यह सब की सोच पर निर्भर करता है | 

क्या होता है कि जब भी कोई जोड़ा घर से भाग कर शादी करता है तो सरकार उसे जिस हॉस्टल में पनाह देती है उस हॉस्टल को लव हॉस्टल  ( Love Hostel ) कहा जा रहा है | लव हॉस्टल ( Love Hostel ) का नामकरण वहां के चौकीदार करने वाला एक व्यक्ति ने रखा है | इस कहानी में असली किरदार का रोल निभाया है एक डागर जिसने ऐसे प्रेमी जोड़े जो कि घर से भाग कर शादी करते हैं उनको ढूंढ-ढूंढ कर मार देने का ठेका ले रखा हो | 

लव हॉस्टल फिल्म ( Love Hostel) के निर्देशक जिनका नाम है शंकर रमन पहले ही बता चुके हैं कि इस फिल्म को देखने के लिए आपको काफी हिम्मत वाला होना चाहिए अर्थात जो व्यक्ति स्क्रीन को देखेगा उसमें कलेजा की जरूरत पड़ेगी | फिल्म में काफी खून खराबा आपको देखने को मिलेगा | वैसे तो इस फिल्म में कोई हीरो नहीं है परंतु दो जरायम पेशा एक दूसरे को मारने के लिए काफी बेताब रहते हैं अर्थात एक दूसरे को मारने के लिए काफी उतारू से हैं फिर इसी बीच में समलैंगिक का भी तड़का शामिल हो जाता है | 

अगर आपके मन में सवाल उठ रहा है कि आप इस फिल्म  ( Love Hostel) को क्यों देखना चाहते हैं तो मैं आपको बता दूं कि इस फिल्म को देखने की एक वजह यह है कि इस फिल्म में बॉबी देवल ने काफी अपना केंद्रीय किरदार निभाया है | बता दे की इस फिल्म को पढ़ने के बाद केंद्रीय किरदार बॉबी देओल ने इस में काम करने से मना कर दिया था | लेकिन जब यह कोशिश दो-तीन बार की गई तो वह भी दे बदले दूसरी बार में इस फिल्म को बनाने के लिए हां कर दी | अगर आप इस फिल्म के केंद्रीय किरदार बॉबी देओल के फैन रहे हैं तो आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए | 

जैसा कि हम आपको बता दे चुके हैं कि डागर नाम का व्यक्ति इस फिल्म में एक भयानक रोल निभाने वाला है | और उस डागर का रोल इस फिल्म में केंद्रीय किरदार बॉबी देओल ने ही निभाया है | इस फिल्म में बॉबी देओल का घटक काफी ही भयानक सा चौंकाने वाला है |

विक्रांत मैसी और सान्या मल्होत्रा ​​लव बर्ड्स हैं। एक बार जब वे घर से उड़ जाते हैं, तो वे घोंसला बनाने के लिए तिनके भी नहीं इकट्ठा कर सकते। बस हवा में लहराते रहो। दोनों ने अपने हिस्से की मेहनत भी पूरी की, लेकिन एक-एक कहानी के हिस्से सफल होने पर भी उन्हें सफलता कहां से मिलती है. फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश में की गई है। फिल्म का फैब्रिक हरियाणा का है। 

हर कोई सिर्फ हरियाणवी बोलता है। यह उद्धरण सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इसके निर्माताओं ने फिल्म के सहायक कलाकारों पर कंजूसी की है। जिन लोगों ने 'बालिका वधू' में सुरेखा सीकरी की एक्टिंग देखी है, वे इस फिल्म को देखते हुए उन्हें बहुत मिस करेंगे। क्योंकि, यहां जो दादी है, वही हवा दिखाती है |

लेकिन इस अभिनय में कोई जान नहीं है। जैसा कि विवेक शाह के कैमरे से देखा जा सकता है कि फिल्म रात में चलती है, दिन में धीमी हो जाती है। साथ ही एक खाली फैक्ट्री में ग्राफिक्स से बने मोर को भी दिखाता है। इस कहानी में कुत्ते एक शक्तिशाली पात्र हैं। फिल्म के क्लाइमेक्स के ट्विस्ट भी उन्हीं का हिस्सा हैं।

फिल्म की अवधि भले ही शुरू से 90 मिनट तय की गई हो, तभी इसके वीडियो एडिटर नितिन बैद और शान मोहम्मद ने ऐसी फिल्म में सभी घटनाओं को बरकरार रखा है, जिसे हटाने से फिल्म की कहानी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। क्लिंटन सेरेजो का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के अहसास से मेल नहीं खाता। 

उसे कोई धुन सुननी चाहिए थी। इसमें हरियाणा के लोकगीतों और लोक गीतों का प्रभाव भी लाया जाना चाहिए था। फिल्म में हरियाणा से और भी बहुत कुछ लाया जा सकता था। अगर स्वदेशी कथा सुनाने वाले भी स्वदेशी सोच के हैं तो बात अलग है, नहीं तो मामला फिर से नकली जैसा लगेगा।