Friday, January 27, 2023
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स्वामी विवेकानंद जयंती 2023 के अवसर पर जानिए स्वामी विवेकानंद के विचार

स्वामी विवेकानंद जयंती 2023 के अवसर पर जानिए स्वामी विवेकानंद के विचार

स्वामी विवेकानंद के विचार – इस आर्टिकल में हम आपको भारत की महान विभूति स्वामी विवेकानंद की जयंती 2023 ( Swami Vivekananda Jayanti 2023) के अवसर पर स्वामी जी के विचार तथा महिलाओं के लिए स्वामी जी ने युवाओं को क्या मार्गदर्शन दिया है इसके बारे में आपको जानकारी देने वाले हैं | 

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय 

अभी हम आपको भारत के महान विभूति स्वामी विवेकानंद जी के जीवन परिचय का वर्णन संक्षेप में करने वाले हैं | स्वामी विवेकानंद जी का जन्म भारत में पश्चिम बंगाल के कोलकाता नामक शहर में 12 जनवरी 1863 को हुआ था | वह एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक सच्चे देशभक्त, कुशल वक्ता तथा स्वामी जी के रूप में अपना जीवन यापन करते थे | 

स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर सादर नमन। उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिकता और कर्मठता के लिए सदैव प्रेरित करता है। उनके महान विचार और आदर्श देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

— Narendra Modi (@narendramodi) January 12, 2023

अतः स्वामी विवेकानंद भारत के उन महान विभूतियों में से थे, जोकि अगर किसी भी किताब को एक बार पढ़ लेते हैं तो उनको वह किताब बहुत जल्द ही याद हो जाती है | इसके अलावा आपको बता दें कि स्वामी विवेकानंद की याददाश्त (मेमोरी) इतनी तेज थी कि वह कभी भी उस पड़ी हुई किताब को नहीं भूलते थे | उनकी असामान्य प्रतिष्ठा को देखते हुए कई सारे विदेशी लोग भी हैरान रह जाते थे | 

आपको बता दें कि इंटरनेट पर लोग यह भी सर्च करते रहते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने शादी क्यों नहीं की ? तो यह बात बिल्कुल सच है कि स्वामीजी ने अपने जीवन में कभी भी शादी नहीं की है | क्योंकि स्वामी विवेकानंद एक घुमाया से परे ऐसी आत्मा थे | जोकि सांसारिक मोहमाया तथा विलासिता से ऊपर उठकर अपना जीवन यापन करना चाहते थे | इसीलिए ही स्वामी विवेकानंद जी ने कभी भी अपने जीवन में शादी नहीं की है | 

राष्ट्रीय युवा दिवस 2023

स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस के अवसर पर 12 जनवरी को हर साल भारत में बड़े धूमधाम से राष्ट्रीय युवा दिवस 2023 मनाया जाता है | राष्ट्रीय युवा दिवस की अगर हम इतिहास की बात करें तो साल 1984 में स्वामी जी के जन्म दिवस के अवसर पर 12 जनवरी को ही भारत सरकार के द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस मनाए जाने का फैसला लिया गया | 

तभी से हर साल साल 1985 से राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को भारत में मनाया जा रहा है | इस अवसर पर कई सारे संस्थान स्कूल और कॉलेज में भाषण और अन्य प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं | जिससे भारतवर्ष का हर एक युवा स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से प्रभावित हो | 

स्वामी विवेकानंद जी के विचार 

भारत की महान विभूतियों में से एक स्वामी विवेकानंद जी अपने विचारों के लिए ही पूरी दुनिया में मशहूर है | इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका के शिकागो शहर में हुए विश्व धार्मिक गुरु सम्मेलन में उन्होंने अपने विचारों से पूरे अमेरिका के नागरिकों को इतना प्रभावित किया कि अमेरिका की एक महिला नागरिक ने स्वामी जी के समक्ष उनसे विवाह करने के लिए प्रस्ताव रखा | उन्होंने अपने प्रस्ताव में कहा कि मैं आपके जैसा पुत्र चाहती हूं ! कृपया आप मुझसे शादी कर लें | 

अमेरिका की महिला नागरिक के इस प्रस्ताव पर स्वामी जी विवेकानंद ने एक बहुत ही खूबसूरत अपना विचार महिला के सामने प्रस्तुत किया | स्वामी जी ने कहा कि अगर आप मेरे जैसा पुत्र चाहती हैं तब आप मुझे ही अपना पुत्र मान सकती हैं | इससे आपकी मेरे जैसा तेज पुत्र पाने की समस्या तो दूर हो जाएगी | साथ ही में मुझे भी आप जैसे एक मां मिल जाएंगी | इतने महान विचार वाले थे स्वामी विवेकानंद जी | 

विवेकानंद जी के महिलाओं के प्रति विचार 

अगर हम स्वामी विवेकानंद जी के महिलाओं के प्रति विचार की बात करें तो हम आपको बता देना चाहते हैं कि स्वामी विवेकानंद जी महिलाओं की ना केवल इज्जत करते थे | बल्कि उनकी स्वतंत्रता के प्रति सहानुभूति रखते थे | 

इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक बार एक व्यक्ति के द्वारा स्वामी विवेकानंद जी से पूछा गया कि- ‘ मैं महिलाओं के उत्थान लिए कुछ करना चाहता हूं | और यह भी बात बहुत बढ़िया है कि आप भी महिलाओं के उत्थान में विश्वास रखते हैं | कृपया आप मुझे बताइए कि मैं ऐसा क्या करूं जिससे भारतीय महिला का उत्थान हो सके ? 

स्वामी जी ने उस व्यक्ति के इस प्रश्न पर अपना जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा कि अगर आप महिला का उत्थान करना चाहते हैं | तब आपको महिलाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं करना है | आप उनको बस अकेला छोड़ दो | वह जो करना चाहती हैं, वह स्वयं कर लेंगी | अब आप लोग समझ ही गए होंगे कि स्वामीजी महिलाओं के प्रति कितने सहानुभूति रखते थे |

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