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जानिए , राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है ?

राष्ट्रीय गणित दिवस 2022 – भारत के मशहूर गणितज्ञ रामानुजन के जन्मदिवस के अवसर पर भारत में हर साल 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है | 

राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है ?

दोस्तों आज है, भारत के महान गणितज्ञ रामानुजन के जन्मदिवस की जयंती | आज की इस पोस्ट में हम आपको गणितज्ञ रामानुजन की जयंती तथा इस के अवसर पर राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं | 

अगर आपका भी फेवरेट सब्जेक्ट गणित है, यह फिर आप अपनी हायर स्टडी गणित जैसे सब्जेक्ट के साथ करना चाहते हैं तो आपकी इस पोस्ट को आप पूरा जरूर पढ़िए | क्योंकि इस पोस्ट में आपको बहुत कुछ सीखने तथा जानने को मिलने वाला है | 

रामानुजन कौन थे ? 

हम आपको बता देना चाहते हैं कि रामानुजन भारत के एक महान गणितज्ञ थे | जिन्होंने गणित के क्षेत्र में भारत की ओर से मशहूर प्रमेय दी है | अतः रामानुजन अपनी गणित की खोजों के लिए जाने जाते हैं | इनका जन्म 22 दिसंबर सन 1887 को तमिलनाडु के एक इरोड नाम के क्षेत्र में ब्राह्मण परिवार में हुआ था | 

बचपन से ही गणित जैसे कठिन सब्जेक्ट के प्रतिभा के धनी रामानुजन को पढ़ने में अत्यधिक रुचि थी | कहा जाता है कि रामानुजन अपनी छोटी कक्षा में ही दसवीं और बारहवीं जैसी बड़ी कक्षाओं के गणित के सवाल आसानी से हल कर लिया करते थे | अब आप लोग इतना तो समझ ही गए होंगे कि रामानुजन कितने ज्यादा प्रतिभाशाली थे | 

राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है ? 

हमें लगता है कि आपको इस सवाल का जवाब तो मिल ही गया होगा कि राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है ? लेकिन फिर भी हम आपको बता देना चाहते हैं कि राष्ट्रीय गणित दिवस भारत के महान गणितज्ञ रामानुजन को अपने क्षेत्र में गणित के खोज करने के लिए भारत सरकार के द्वारा मनाया जाता है | इस दिन कई सारी संस्थाओं में गणित से संबंधित प्रतियोगिता रखी जाती है, जिन में भाग लेने वाले छात्र -छात्राओं को सम्मानित भी किया जाता है | 

रामानुजन की शैक्षणिक जानकारी 

आपको बताने की मशहूर इंडियन गणितज्ञ रामानुजन अपने स्कूल के दिनों में ही बड़ी-बड़ी कक्षाओं के कठिन से कठिन सवाल चुटकियों में हल कर लिया करते थे | काफी कठिन परिस्थितियों में अपने स्कूल की परीक्षाएं संपन्न की है | कई बार तो उनके शिक्षक भी देख कर चौक जाते थे, रामानुजन की प्रतिभा को देखकर | 

श्रीनिवास रामानुजन साल 1930 में कुंभकोणम के एक गवर्नमेंट कॉलेज में अपनी गणित की परीक्षा का अध्ययन किया | आपको बता दें कि वह गणित विषय को लेकर इतने ज्यादा सीरियस रहते थे कि अन्य विषय में फेल हो जाते थे| उन्होंने साल 1912 में मद्रास के पोर्ट ट्रस्ट में एक क्लर्क के रूप में भी काम किया था | 

इसी के चलते उन्होंने अपने बीएससी की डिग्री साल 1916 में पूरी कर ली | जिसके बाद रामानुजन साल 1917 में लंदन की एक मैथमेटिकल सोसायटी के लिए चुना गया था | अतः कैंब्रिज विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले ट्रिनिटी कॉलेज मैं वह फेलोशिप पाने वाले पहले भारतीय के रूप में रामानुजन को जाना जाता है | 

आपको बता दें कि साल 1919 में रामानुजन अपने मातृभूमि देश भारत को लौट आए थे | जिसके बाद उन्होंने साल 1920 में दुनिया में अंतिम सांस ली | रामानुजन को गणित के कई सारे कठिन सवाल के लिए थ्योरम देने के लिए जाना जाता है |

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